परिचय
मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट एक बार फिर युद्ध की आग में घिरा हुआ है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर आश्चर्यजनक हवाई हमले शुरू किए, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदल गया। इस युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसके बाद ईरान ने पूरे क्षेत्र में जवाबी हमले शुरू कर दिए। लेबनान में हिजबुल्लाह की एंट्री, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना और गल्फ देशों पर हमले ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे “नियंत्रण से बाहर” बताया है।
युद्ध की शुरुआत और मुख्य घटनाएं
युद्ध की शुरुआत परमाणु वार्ताओं के दौरान हुई। अमेरिका और इजरायल ने लगभग 900 हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और नेतृत्व को निशाना बनाया। तेहरान और अन्य शहरों में हमलों में खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। एक स्कूल पर हमले में 170 से अधिक बच्चे मारे गए, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई।
ईरान ने जवाब में इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और गल्फ देशों (बहराइन, कुवैत, कतर, यूएई, सऊदी अरब) पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और हजारों समुद्री कर्मी फंस गए। ईरान ने गल्फ राज्यों पर अभूतपूर्व हमले किए
लेबनान फ्रंट का खुलना
2 मार्च 2026 को हिजबुल्लाह ने इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए। इजरायल ने जवाब में लेबनान में भारी हवाई हमले किए, दक्षिणी लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू किया और बेरूत के दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाया। इजरायल ने लितानी नदी तक “बफर जोन” बनाने की बात कही है। हिजबुल्लाह ने सैकड़ों हमले किए, जिसमें इजरायली शहरों और सैन्य ठिकानों को लक्षित किया गया। लेबनान से लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं।
वर्तमान स्थिति (26 मार्च 2026 तक)
ईरान पर हमले: अमेरिका और इजरायल ने 10,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए। ईरान की नौसेना के 92% बड़े जहाज नष्ट हो चुके हैं और मिसाइल/ड्रोन क्षमता काफी कमजोर हुई है। ईरान अब भी इजरायल पर मिसाइलें दाग रहा है।
ट्रंप का रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध को “जीत लिया” बताया है, लेकिन 15-पॉइंट प्लान के जरिए युद्ध समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, लेकिन “बिना शर्त समर्पण” से इनकार कर रहा है। मध्यस्थों (ओमान, मिस्र, पाकिस्तान) के जरिए बातचीत चल रही है।
गल्फ और अन्य: अबू धाबी में मलबे से मौतें हुई हैं। होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ी हैं।
हिजबुल्लाह: रोजाना 40-50 हमले कर रहा है। इजरायल दक्षिणी लेबनान में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।
मानवीय और वैश्विक प्रभाव
मौते: ईरान में 1,300+ मौतें (जिसमें बच्चे शामिल), लेबनान और इजरायल में सैकड़ों। कुल मौतें 2,000 से अधिक अनुमानित।
विस्थापन: लेबनान में 3 लाख से अधिक लोग भागे। गाजा में भी तनाव बरकरार।
आर्थिक: तेल आपूर्ति बाधित, वैश्विक बाजार प्रभावित। शिपिंग रूट बंद।
अंतरराष्ट्रीय: यूएन ने व्यापक युद्ध की चेतावनी दी है। रूस जैसे देश ईरान को समर्थन दे रहे हैं।
भारत पर प्रभाव : भारत मिडिल ईस्ट से 60% से अधिक तेल आयात करता है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारतीय समुदाय और व्यापार प्रभावित हो रहे हैं। भारत ने शांति अपील की है और नागरिकों की सुरक्षा पर नजर रखी हुई है।
निष्कर्ष
यह युद्ध ईरान की क्षेत्रीय शक्ति को कमजोर करने का प्रयास लगता है, लेकिन इससे पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ गई है। दोनों पक्ष हार-जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन बातचीत की उम्मीद बनी हुई है। यदि युद्ध लंबा खिंचा तो यह विश्व युद्ध की आशंका पैदा कर सकता है। शांति वार्ता और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है।
स्रोत: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स (अल जजीरा, सीएनएन, रॉयटर्स, एसीएलईडी आदि) के आधार पर संकलित।यह आर्टिकल लगभग 800-1000 शब्दों का है। आप अपनी वेबसाइट के अनुसार शीर्षक, सब-शीर्षक या अतिरिक्त फोटो/ग्राफिक्स जोड़ सकते हैं। अगर कोई बदलाव चाहिए (जैसे ज्यादा फोकस किसी पहलू पर, लंबाई या तारीख अपडेट), तो बताएं!