ट्रंप ने भारत को नरक बताया, अब सवाल है – ‘चाय पिलो’ वाली दोस्ती कहाँ गई?
23 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक विवादित पोस्ट शेयर किया, जिसमें भारत और चीन जैसे देशों को “धरती पर नरक” (hellholes on the planet) करार दिया गया। यह पोस्ट अमेरिकी रेडियो होस्ट और कंजर्वेटिव कमेंटेटर माइकल सैवेज के पॉडकास्ट का ट्रांसक्रिप्ट था, जो जन्मसिद्ध नागरिकता (birthright citizenship) के खिलाफ था।
सैवेज ने कहा था – “एक बच्चा यहां जन्म लेता है तो वह तुरंत अमेरिकी नागरिक बन जाता है, फिर वे पूरे परिवार को चीन या भारत या धरती के किसी और नरक से यहां बुला लेते हैं।” ट्रंप ने इस पूरे पत्र/ट्रांसक्रिप्ट को शेयर कर दिया, जिससे भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं।
भारत का आधिकारिक जवाब
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने संयमित लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा – “हमने कुछ रिपोर्ट्स देखी हैं… यहीं छोड़ता हूं।” भारत ने इस मुद्दे पर कोई तीखा जवाब देने से परहेज किया और कूटनीतिक शालीनता बनाए रखी। विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाया कि वे ट्रंप के इस बयान पर चुप क्यों हैं, खासकर जब दोनों नेताओं के बीच “दोस्ती” का दावा किया जाता रहा है।
ईरान का समर्थन
ईरान के हैदराबाद स्थित वाणिज्य दूतावास ने भारत और चीन की तरफ से मजबूत बयान दिया। उसने कहा कि भारत और चीन “सभ्यता के पालने” हैं, जबकि असली नरक तो अमेरिका की कुछ नीतियां और रवैया बन रहे हैं। ईरान ने ट्रंप के बयान को नस्लवादी और असभ्य बताया।
विवाद की पृष्ठभूमि
ट्रंप का यह पोस्ट अमेरिका में birthright citizenship पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच आया। सैवेज और ट्रंप का तर्क था कि यह कानून विदेशी नागरिकों को अमेरिका में बच्चा पैदा कराकर पूरे परिवार को सिटिजनशिप दिलाने का रास्ता देता है। लेकिन भाषा अत्यंत अपमानजनक थी। भारत जैसे देशों पर “hellhole” कहना न सिर्फ कूटनीतिक रूप से गलत है, बल्कि भारत की उभरती वैश्विक छवि, आर्थिक प्रगति, IT सेक्टर, योग, संस्कृति और लोकतंत्र को पूरी तरह नजरअंदाज करता है।
भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, स्पेस, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स में अग्रणी है। लाखों भारतीय अमेरिका में योगदान दे रहे हैं – डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, CEO। ऐसे में इस तरह का सामान्यीकरण न सिर्फ गलत है, बल्कि पूर्वाग्रह से भरा है।
ट्रंप का बाद में पलटाव?
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 24 घंटे के अंदर ट्रंप ने अपना स्टैंड नरम करते हुए भारत को “महान देश” बताया, लेकिन मूल पोस्ट का असर बना रहा।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह बयान अमेरिकी आंतरिक राजनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। भारत ने संयम दिखाया, जो उसकी परिपक्व कूटनीति को दर्शाता है। लेकिन नागरिकों के मन में सवाल जरूर उठा – क्या “सबसे पुरानी दोस्ती” सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
भारत “धरती पर नरक” नहीं, बल्कि आशा, विविधता और प्रगति का प्रतीक है। ट्रंप जैसे नेताओं को यह समझना चाहिए कि 21वीं सदी में सम्मान दोतरफा होता है।
देश दर्पण की रिपोर्ट: सच्चाई की आवाज, बिना किसी समझौते के।