लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सीसीटीवी फुटेज का नियम क्यों बदला? राहुल गांधी का तीखा हमला, ‘वोट चोरी’ को बताया सबसे बड़ा राष्ट्र-विरोधी कृत्य

दिनांक: 10 दिसंबर 2025

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2024 के ठीक बाद, मई 2025 में चुनाव आयोग (ECI) ने एक विवादास्पद नियम लागू किया, जिसके तहत पोलिंग स्टेशनों पर लगे सीसीटीवी फुटेज को परिणाम घोषित होने के 45 दिनों बाद नष्ट करने की अनुमति दी गई। इस बदलाव पर विपक्ष ने जोरदार हमला बोला है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को संसदीय बहस के दौरान बड़े आरोप लगाते हुए कहा कि यह बदलाव चुनावों में ‘वोट चोरी’ को आसान बनाने के लिए किया गया। उन्होंने सरकार पर ‘संस्थागत कब्जे’ का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी, “हम कानून को पूर्वव्यापी रूप से बदल देंगे, और हम आपको ढूंढ लेंगे।” यह बयान संसद की विन्टर सेशन में चुनाव सुधारों पर बहस के दौरान आया, जो लोकतंत्र की नींव पर सवाल खड़े कर रहा है।

कानून में बदलाव: 45 दिनों की समय सीमा का रहस्य

चुनाव 2024 के परिणाम 4 जून 2024 को घोषित हुए थे। इसके ठीक एक साल बाद, 30 मई 2025 को ECI ने नया नियम जारी किया, जिसमें सीसीटीवी फुटेज को केवल 45 दिनों तक रखना अनिवार्य किया गया। पहले, फुटेज को लंबे समय तक संरक्षित रखा जाता था, खासकर अगर कोई चुनाव याचिका दायर की जाती। ECI का तर्क है कि यह ‘स्टोरेज स्पेस’ की समस्या से निपटने के लिए है, और फुटेज केवल तभी रखा जाता है जब कोई हाईकोर्ट में 45 दिनों के अंदर याचिका दायर करे। लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह बदलाव ‘चुनावी धांधली’ को छिपाने के लिए है।

राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा, “CCTV फुटेज को 45 दिनों बाद नष्ट करने का नियम क्यों बदला गया? इसका क्या मतलब है? यह डेटा की समस्या नहीं, बल्कि चुनाव चोरी करने की साजिश है।” उन्होंने हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में वोटर लिस्ट में फर्जी वोटरों के उदाहरण दिए, जहां एक ही पते पर 80 लोग रजिस्टर्ड थे। उनका दावा है कि 2024 चुनावों में ECI ने भाजपा के साथ मिलकर ‘वोट चोरी’ की, और यह फुटेज नष्ट करने से सबूत मिट जाते हैं।

राहुल गांधी के बड़े आरोप: ‘वोट चोरी’ सबसे बड़ा राष्ट्र-विरोधी कृत्य

लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने चार प्रमुख सुधारों की मांग की:

  1. वोटर लिस्ट की पारदर्शिता: चुनाव से एक महीने पहले सभी पार्टियों को मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट दें।
  2. सीसीटीवी फुटेज संरक्षण: 45 दिनों बाद फुटेज नष्ट करने वाला कानून वापस लें।
  3. EVM एक्सेस: EVM की आर्किटेक्चर का खुलासा करें और पार्टियों को जांच की अनुमति दें।
  4. EC चयन प्रक्रिया: मुख्य चुनाव आयुक्त चयन पैनल में CJI को शामिल करें और आयुक्तों को मिली ‘पूर्ण छूट’ को हटाएं।

गांधी ने RSS और BJP पर संस्थाओं पर ‘कब्जा’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “भारत की एकता वोट से बनी है। वोट चोरी सबसे बड़ा राष्ट्र-विरोधी कृत्य है।” उन्होंने दिसंबर 2023 के संशोधनों का जिक्र किया, जहां EC आयुक्तों को कानूनी सजा से छूट दी गई। “पीएम और गृह मंत्री ने यह ‘इम्यूनिटी का तोहफा’ क्यों दिया? CJI को EC चयन पैनल से क्यों हटाया?” उनका कहना था कि ECI ‘भाजपा का एजेंट’ बन गई है।

2025 चुनावी विवाद: 2024 चुनावों की छाया

यह विवाद 2024 लोकसभा चुनावों से जुड़ा है, जहां कांग्रेस ने कर्नाटक के महादेवपुरा में 11,956 डुप्लिकेट वोटर, 40,000 अमान्य पते और 10,452 बल्क रजिस्ट्रेशन के सबूत पेश किए। राहुल ने कहा कि भाजपा ने हरियाणा में एक ब्राजीलियन महिला को 22 बार वोटर लिस्ट में डाला। ECI ने इन दावों को खारिज किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में मशीन-रीडेबल लिस्ट की मांग ठुकराई थी।

सरकार का जवाब: ‘गलतफहमी’, फुटेज अभी उपलब्ध

भाजपा ने राहुल के आरोपों को खारिज किया। IT सेल प्रमुख संबित पात्रा ने कहा, “राहुल गांधी को चुनाव प्रक्रिया की समझ नहीं। बिहार चुनाव का फुटेज अभी 20 दिन और उपलब्ध है। वे मांग लें तो दे देंगे।” विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ECI की कार्यप्रणाली संसद में बहस का विषय नहीं। ECI ने स्पष्ट किया कि फुटेज केवल याचिका पर रखा जाता है, और स्टोरेज समस्या वास्तविक है।

निष्कर्ष: लोकतंत्र की परीक्षा

यह विवाद चुनावी पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। राहुल गांधी का बयान विपक्ष को एकजुट कर सकता है, जबकि सरकार इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ बता रही। विशेषज्ञों का कहना है कि सीसीटीवी नियम को लंबे समय तक रखना जरूरी है ताकि सबूत सुरक्षित रहें। देश दर्पण इस बहस पर नजर रखेगा।

लेखक: देश दर्पण संपादकीय टीम (हम न नफरत फैलाते हैं, न नजरें फेरते हैं – सिर्फ सच दिखाते हैं)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *